धनतरेस के दिन खरीदारी की प्रथा है। माना जाता है कि इस दिन धातु का सामना और बर्तन खरीदने से लक्ष्मी माता की कृपा पूरे साल बनी रहती है। आधुनिक युग में वाहन और बिजली से चलने वाले उत्पाद भी धनतेरस के दिन खरीदे जाने लगे हैं। इसका कारण यह है कि धनतेरस को अबुझ मूहुर्त कहा गया है। इसका मतलब है बिना पंचांग देखे खरीदारी और निवेश किया जा सकता है।
इस समय नहीं करें खरीदारी लेकिन हर दिन कुछ समय शुभ कार्य एवं खरीदारी के लिए अशुभ माने गए हैं। धनतेरस के दिन भी खरीदारी करते समय अशुभ समय से बचना चाहिए। ज्योतिषशास्त्री पंडित जयगोविंदशास्त्री कहते हैं कि इस साल धनतेरस शुक्रवार को है। इसलिए साढ़े दस से बारह बजे तक राहु काल रहेगा। इस समय खरीदारी करने से बचना चाहिए।
राहुकाल बीत जाने के बाद दिल्ली में 12 बजकर 5 मिनट से 1 बजकर 37 मिनट तक का समय बर्तन एवं सोना, चांदी, हीरा खरीदने के लिए उत्तम है। वाहन की खरीदारी करने के लिए 4 बजकर 10 मिनट से 5 बजकर 33 मिनट का समय श्रेष्ठ है।
वैसे 12 बजे से 9 बजकर 22 मिनट तक का समय खरीदारी करन के लिए अनुकूल रहेगा। इसके बाद भ्रदा शुरू हो जाएगा। भद्रा लगने के बाद कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। माना जाता है कि भ्रदा के दौरान शुभ काम करने से अशुभ फल मिलता है।
चांदी और हीरा खरीदाना शुभ इस साल शुक्रवार के दिन धनतेरस होने के कारण चांदी और हीरा खरीदना अधिक शुभ रहेगा। इसका कारण यह है कि शुक्रवार के स्वामी ग्रह शुक्र हैं। चांदी और हीरा को शुक्र से प्रभावित वस्तु माना गया है। शुक्र सुख समृद्घि देने वाला ग्रह है। शुक्र की वस्तु घर आने से सुख-समृद्घि में वृद्घि होगी।
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