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मकर संक्रांति पर फंसा पेंच, कब मनाएंगे त्योहार?

किरण राय/ज्योतिषशास्त्री

अपने यहां 14 जनवरी का मतलब है “मकर-संक्राति”अर्थात सूर्य का शनि की राशि “मकर” में प्रवेश होना। सिर्फ यही त्यौहार है जिसकी तारीख लगभग निश्चित है। यह “उत्तरायण पुण्यकाल” के नाम से भी जाना जाता है। इस काल में लोग गंगा-स्नान करके अपने को पाप से मुक्त करते है।

इस अवसर को भिन्न-भिन्न राज्यों में अपने–अपने तरीकों से मनाया जाता है यह ठंड  से वसंत ऋतु की ओर अग्रसर होने का एक इशारा भी होता है तथा इसके पश्चात दिन की अवधि भी लंबी होने लगती है।

आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। पेंच लड़ाए जाते हैं। गीत संगीत होता है। कन्याएं जानवरों, पक्षियों और मछलियों को भोजन देती हैं। महिलाएं गुड़-तिल, खिचड़ी या विभिन्न प्रकार के मिष्ठान का इंतज़ाम करती हैं। कुल मिलाकर यह एक बड़ा रोमांचकारी अवसर होता है सबके लिए। हर तरफ हर्ष उल्लास का वातावरण बन जाता है।

यह त्यौहार परंपरागत तौर पर हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार मकर संक्राति 15 जनवरी को मनाई जा रही है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश तो 14 जनवरी को 19.26 बजे होगा। लेकिन संक्रांति पुण्य काल 15 जनवरी को सूर्योदय से 11.26 दोपहर तक रहेगा। नतीजतन संक्रांति 15 तारिख को ही मनाई जाएगी।
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