{"_id":"636cd38bd95efa190101424f","slug":"gujarat-election-2022-delhi-cm-arvind-kejriwal-kundli-analysis-and-predictions","type":"story","status":"publish","title_hn":"Arvind Kejriwal Horoscope: क्या कहती है अरविंद केजरीवाल की कुंडली ? क्या गुजरात चुनाव में पड़ेगा उनका प्रभाव ?","category":{"title":"Astrology","title_hn":"ज्योतिष","slug":"astrology"}}
Arvind Kejriwal Horoscope: क्या कहती है अरविंद केजरीवाल की कुंडली ? क्या गुजरात चुनाव में पड़ेगा उनका प्रभाव ?
Thu, 10 Nov 2022 04:07 PM IST
विनोद शुक्ला
आनंद पाराशर
आनंद पाराशर
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 10 Nov 2022 04:07 PM IST
सार
क्या कहती है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कुंडली ? जन्मपत्री से समझने की कोशिश करेंगे कि किन ग्रहों के कारण उन्हें राजनीतिक सफलता मिलती जा रही है और क्या गुजरात में उनकी पार्टी को उनकी लोकप्रियता का लाभ मिलेगा ?
विज्ञापन
Arvind Kejriwal Kundali
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Arvind Kejriwal Kundli Analysis And Predictions : दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल वर्तमान में ‘आम आदमी पार्टी’ के लिए गुजरात में प्रचार कर रहे है। उनकी नजर कांग्रेस के वोट बैंक पर है। एक आंदोलन से शुरू हुआ अरविन्द केजरीवाल का सफर समय के साथ-साथ बढ़ता रहा है। दिल्ली में जहां उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों का सूपड़ा साफ़ किया वहीं पंजाब में भी शानदार सफलता हासिल की। वही उनकी निगाहें अब गुजरात पर है। आज इस लेख में हम उनकी जन्मपत्री से समझने की कोशिश करेंगे कि किन ग्रहों के कारण उन्हें राजनीतिक सफलता मिलती जा रही है और क्या गुजरात में उनकी पार्टी को उनकी लोकप्रियता का लाभ मिलेगा ?
विज्ञापन
- राजनीति में सफल होने के लिए कर्क और सिंह राशि, गुरु, शनि का बलवान होना ज़रूरी होता है। दरअसल चन्द्रमा रानी है और सूर्य राजा है इसलिए जब सूर्य गुरु और शनि का इन राशियों से संबंध बनता है तो व्यक्ति को लीडर बनने में मदद मिलती है। इनकी कुंडली में लग्नेश, धनेश और लाभेश की चौथे भाव में सिंह राशि में युति है।
- केंद्र स्थान में विराजमान गुरु के कारण इस राजयोग में और शुभता आ रही है। इन तीनों ग्रहों का प्रभाव दशम भाव पर आ रहा है। वहीं तीसरे भाव से मंगल की दृष्टि भी दशम भाव पर आ रही है। यही कारण है की अरविन्द केजरीवाल विस्तारवाद की नीति को अपना रहे है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि मंगल चन्द्रमा का राशि परिवर्तन राजयोग है जिसे महर्षि पराशर ने सबसे बलवान राजयोग कहा है।
- यहां मंगल चन्द्रमा की राशि में नीच का होकर विराजमान है वही चन्द्रमा मंगल की राशि मेष में विराजमान होकर नीच भंग राजयोग बना रहा है। इसी के कारण इनका पराक्रम राजनीति में अब बढ़ता ही जा रहा है। राजनीति में जनता का कारक चौथा भाव गुरु शुक्र बुध जैसे 3 शुभ ग्रह से युत होने के कारण इन्हे अच्छे बहुमत से विजयी बना देता है। पंचम के केतु और लाभ में राहु होने के कारण इन्हे अपने ही लोगों के द्वारा बदनामी झेलनी होती है।
- यहां दशम भाव के स्वामी शनि का 12वें भाव में नीच होकर छठे भाव पर दृष्टिपात करना इस बात का संकेत है कि जातक अपने काम को छोड़कर किसी बड़े आंदोलन का हिस्सा बन सकता है। दशम भाव और दशमेश दोनों पर गुरु की दृष्टि होने से जातक को लोगों का साथ मिलता है। यहां शनि की भाग्य स्थान पर दृष्टि से उन्हें जनादेश में मजबूती आ रही है। तीसरे भाव में नीच के मंगल पर राहु की दृष्टि के कारण वो किसी पर भी आरोप लगा देते है और यही कारण है कि उन्हें माफ़ी भी मांगनी पड़ती है।
- साल 2010 के बाद से ही गुरु की महादशा आते ही उन्होंने ज़बरदस्त सफलता प्राप्त की और आगे भी ऐसी उम्मीद जताई जा सकती है। गोचर में 23 अक्टूबर से मार्गी शनि उनके लिए सहायक बने हुए है वहीं चुनाव से पहले गुरु भी मार्गी हो जाएंगे।
- राहु का गोचर लग्न में होने से और गुरु पर शनि के प्रभाव के कारण वो हिंदुत्व की राह पर अपने वोट बैंक को मजबूत करना चाह रहे है जिसमें उन्हें सफलता मिलती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि सूर्य का गोचर अष्टम में और मारक स्थान में मंगल वक्री होने से कठिनाई आ सकती है।
- गोचर में 16 नवंबर से सूर्य मंगल का सम सप्तक योग उन्हें दिक्कत दे सकता है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उन्हें भले ही आशातीत सफलता हाथ न लगे लेकिन इतना तय है कि भारतीय राजनीति की पिच पर अभी उन्हें लम्बी पारी खेलनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन