ब्रिटिश काल से चले आ रहे गंगा बंदी और गंगा क्लोजर को लेकर धर्मनगरी हरिद्वार में तमाम परिवार आसरा लगाये रखते हैं। गंगा बंदी के बाद सभी धारा में उतरते हैं, अपने अपने मेहनत के बूते पर वह धन और वैभव की तलाश करते हैं। बीते वर्ष में लगभग कांवड़ मेले के दौरान लगभग पाँच करोड़ लोग गंगा स्नान किए। प्रति व्यक्ति यदि ₹1 ही फेंका हो, तो कम से कम से कम पाँच करोड़ इस गंगा में मिलते ही हैं। यही नहीं श्रद्धा और आस्था के इस केंद्र में धर्मनगरी में आकर लोग मनोवांछित फल की कामना के लिए कई बहुमूल्य वस्तुएँ भी गंगा को अर्पित करते हैं। गंगा बंदी के दौरान ये वस्तुएं नियारिया, जो गंगा में पैसा धन वैभव तलाशते हैं, ऐसे समुदाय के लिए यह दशहरा भी बंदी और दीपावली से पहले खुलने वाला द्वार उनके साल भर के जीवन को पार्जन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। आज की रात बंद होने वाली गंग नहर ने दिखाया कि कितने लोग इस बंद गंग धारा में कूद पड़े हैं। श्रमिक अपना काम छोड़ दिए हैं। राजगीर भी इसी में अपने भाग्य की तलाश कर रहे हैं। यही नहीं, कई आम आदमी भी सूख रही गंग धारा में अपने अपने भाग्य को तलाश रहे ।