एक तरफ रामनगरी में रिमझिम फुहारों ने लोगों को गर्मी से राहत दी, तो दूसरी तरफ इसी बारिश ने सैकड़ों परिवारों की आंखों में आंसू ला दिए। शहर की चमचमाती सड़कों के पीछे की हकीकत नवीन मंडी और गलियों में बहते सीवर के पानी ने उजागर कर दी। सुबह जब लोग नींद में थे, नवीन सब्जी मंडी के व्यापारी अपनी रोजी-रोटी के लिए सब्जियां सजा रहे थे। तभी सीवर का नाला उफन पड़ा। देखते ही देखते काला, बदबूदार पानी पूरी मंडी में फैल गया। हरी-भरी सब्जियां, टमाटर, धनिया, पालक - जो कुछ देर पहले तक ग्राहकों के इंतजार में थीं, वही गंदे नाले के पानी में तैरती दिखीं। एक सब्जी विक्रेता की आंखें भर आईं। बोला - "साहब, 5000 की सब्जी लाया था उधारी पर, सब बर्बाद हो गई। अब घर कैसे चलेगा?" यही हाल शहर के दूसरे इलाकों का भी है। काली चौरा रोड पर घुटने भर पानी में बच्चे स्कूल जाने को मजबूर हैं। जनौरा, गुलाबबाड़ी, गांधी नगर, आदर्श पुरम और फतेहगंज में तो पानी लोगों के घरों में घुस गया। रसोई में चूल्हा नहीं जल रहा, बिस्तर भीग गए हैं। एक बुजुर्ग महिला अपने घर के दरवाजे पर खड़ी होकर नाले का पानी निकलने का इंतजार कर रही थी। लोगों का कहना है कि नगर निगम हर साल बरसात से पहले बड़े-बड़े दावे करता है। नाला सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, पर जमीन पर कुछ नहीं होता। गरीब की कमाई नाले में बह जाती है और जिम्मेदार आंखें मूंद लेते हैं।