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शिमला में एसएफआई ने भाजपा, आरएसएस और ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया, नीतियों के खिलाफ किया प्रदर्शन

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) इकाई ने दशहरे के अवसर पर मंगलवार को समरहिल चौक स्थित लाल चौक पर पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन ने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाए। इसके साथ ही मनुवाद, जातिवाद, फासीवाद और पूंजीवाद के प्रतीकात्मक पुतलों का भी दहन किया। प्रदर्शन के दौरान एसएफआई कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाए। संगठन ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा के भगवाकरण, कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देने और असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। एसएफआई ने कहा कि दशहरा अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। संगठन ने इसी संदेश के तहत जनविरोधी नीतियों और सामाजिक असमानता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की बात कही। एसएफआई के कैंपस सचिव उपेंद्र कुमार ने कहा कि देश में वैज्ञानिक सोच, सामाजिक न्याय और समानता के पक्ष में आवाज उठाना छात्र संगठनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि छात्र अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा। एसएफआई के राज्य सह सचिव कमल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 के बाद देश में सांप्रदायिक हिंसा बढ़ी है और आर्थिक असमानता गहरी हुई है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार और आरएसएस की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। कमल ने कहा कि जातिवाद, आर्थिक शोषण और सांप्रदायिक विभाजन के खिलाफ संगठन का संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन में एसएफआई के कैंपस अध्यक्ष आशीष चौहान सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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