हिमाचल प्रदेश की पहली फीचर फिल्म ‘खूंटा’ ने हिमाचल और उत्तराखंड के जौनसार क्षेत्र की संस्कृति, लोक परंपराओं, गीत-संगीत और आस्था को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है। फिल्म का 16 मई 2026 को फ्रांस में आयोजित विश्वविख्यात कान्स फिल्म फेस्टिवल के मार्केट प्रीमियर में प्रदर्शन हुआ था। अब यह फिल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों और आगामी रिलीज को लेकर शुक्रवार को राजधानी के जश्न रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान फिल्म की रचनाकार और निर्देशिका अनुशी शर्मा सहित टीम के अन्य सदस्यों ने फिल्म से जुड़ी जानकारी साझा की। अनुशी शर्मा ने बताया कि ‘खूंटा’ की खासियत यह है कि इसमें पहाड़ों को केवल खूबसूरत लोकेशन के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि यहां की संस्कृति, संवेदना, संघर्ष और आस्था को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है। फिल्म में हिमाचल और उत्तराखंड के जौनसार क्षेत्र की लोक परंपराओं, गीत-संगीत और सामाजिक जीवन की झलक देखने को मिलेगी। फिल्म में महासू महाराज के प्रति लोगों की आस्था को भी प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। कहानी के माध्यम से प्रकृति और इंसान के रिश्ते को केंद्र में रखा गया है। फिल्म यह संदेश देती है कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति और पर्यावरण की कीमत पर नहीं। निर्देशिका के अनुसार, फिल्म के जरिए पहाड़ की उस आवाज को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जो अक्सर बड़े मंचों पर अनसुनी रह जाती है। ‘खूंटा’ में पहाड़ी समाज की जड़ों, उसकी आस्था और बदलते दौर में सामने आ रही चुनौतियों को संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया है। कान्स फिल्म फेस्टिवल के मार्केट प्रीमियर में प्रदर्शन को फिल्म की टीम ने बड़ी उपलब्धि बताया। टीम का कहना है कि इससे हिमाचल की संस्कृति और यहां के कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का अवसर मिला है। फिल्म की कहानी और प्रस्तुति के माध्यम से पहाड़ की लोक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। अब 18 सितंबर को ‘खूंटा’ के सिनेमाघरों में रिलीज होने से प्रदेश के दर्शकों में भी उत्सुकता बढ़ गई है। फिल्म की टीम को उम्मीद है कि दर्शक इसे केवल एक फिल्म के तौर पर नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, आस्था और पर्यावरण से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज के रूप में भी देखेंगे।