भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कनोई में घटी हालिया घटना को लेकर पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को 'तानाशाही' करार देते हुए कहा कि सत्ता के अंतिम दौर में भी जुल्म और धक्केशाही थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते उगराहां ने गंभीर आरोप लगाया कि कनोई में हुई घटना का सीधा संबंध पंजाब सरकार और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा से है। सरकार की ओर से दी जा रही दलीलों को खारिज करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेडिकल अफसरों का कहना था कि शव खराब हो रहा है, तो फिर पीड़ित परिवार को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया?" उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रोती-बिलखती मां और परिवार की महिलाओं को दरकिनार कर जबरन शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह पूरी तरह से तानाशाही और मानवाधिकारों का हनन है।उगराहां ने निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही सरकारें ढीली पड़ जाती हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी सरकार का रवैया अभी भी टस से मस नहीं हुआ है। बेरोजगारों और किसानों पर लाठियां भांजी जा रही हैं। किसान महीनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। नेताओं के दिमाग पर यह गुरूर चढ़ चुका है कि वे दोबारा जीत जाएंगे, लेकिन इसका फैसला वक्त और जनता करेगी। - 'एमएसपी पर केंद्र का छलावा, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करे सरकार'— केंद्र सरकार को घेरते हुए किसान नेता ने कहा कि गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी करके देश के किसानों के साथ अन्याय किया गया है। 2027 तक पंजाब को खुशहाल बनाने और गृह मंत्री अमित शाह के 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने के दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि भाजपा शासित हरियाणा व अन्य राज्यों में नशा खत्म क्यों नहीं हुआ? सरकार का असली मकसद सरकारी मंडियों को खत्म कर प्राइवेट कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाना है। उन्होंने माँग की कि फसल की कुल लागत में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर भाव तय किया जाए। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को हूबहू लागू किया जाए। फसलों को लागत मूल्य से कम दर पर बिकने से रोकने के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी का कानून बनाया जाए।