इंडोनेशिया में एक बार फिर ज्वालामुखी का खौफ देखने को मिला है... सुंडा जलडमरूमध्य में मौजूद अनक क्राकाटोआ ज्वालामुखी रविवार तड़के अचानक फट पड़ा... विस्फोट के बाद आसमान में राख का गुबार छा गया... राख करीब 50 हजार फीट तक पहुंची और पश्चिमी इंडोनेशिया के कई इलाकों की तरफ बढ़ गई... हालात इतने बिगड़े कि राजधानी जकार्ता समेत कई एयरपोर्ट का हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा... सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुईं और हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा... वहीं, अधिकारियों ने ज्वालामुखी के आसपास खतरा बरकरार रहने की चेतावनी दी है...
ये तस्वीरें इंडोनेशिया के अनक क्राकाटोआ ज्वालामुखी की हैं... रविवार सुबह करीब 3 बजकर 53 मिनट पर ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ... भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक विस्फोट करीब 30 सेकंड तक चला... कैमरों में ज्वालामुखी से लावा निकलने की गतिविधि भी रिकॉर्ड हुई...
अनक क्राकाटोआ जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित है... अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार से ही ज्वालामुखी में गतिविधियां बढ़ रही थीं और रविवार का विस्फोट इस मौजूदा दौर का सबसे शक्तिशाली विस्फोट रहा...
विस्फोट के बाद ज्वालामुखीय राख तेजी से आसपास के इलाकों में फैलने लगी...
राख का सबसे बड़ा असर हवाई सेवाओं पर पड़ा... जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे समेत कई एयरपोर्ट का हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा...
रविवार दोपहर तक कुल 516 उड़ान गतिविधियां प्रभावित हुईं... इनमें अकेले सोएकार्नो-हत्ता एयरपोर्ट की 202 उड़ानें शामिल थीं... इससे करीब **22 हजार 800 यात्रियों** को परेशानी हुई...
एयरपोर्ट को कम से कम शाम 5 बजकर 30 मिनट तक बंद रखने का आदेश दिया गया था... जकार्ता के हलीम परदानाकुसुमा एयरपोर्ट, लांपुंग के रादिन इंतेन द्वितीय एयरपोर्ट समेत कई अन्य हवाईअड्डों पर भी उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ...
बाली और मेदान में भी उड़ान सेवाओं पर असर देखने को मिला...
लेकिन खतरा सिर्फ उड़ानों तक सीमित नहीं है... ज्वालामुखीय राख इंसानों और विमानों दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है...
इंडोनेशिया की ज्वालामुखी एजेंसी और डार्विन ज्वालामुखीय राख सलाह केंद्र ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए राख के दो बड़े बादल पहचाने हैं...
एक राख का गुबार करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचा और जकार्ता, बांतन तथा पश्चिमी जावा की तरफ बढ़ा...
वहीं दूसरा गुबार करीब 50 हजार फीट यानी 15 हजार 200 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया... यह बांतन, लांपुंग और बेंगकुलु के हिस्सों के साथ सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर की तरफ बढ़ा...
अधिकारियों ने ज्वालामुखीय राख, जहरीली गैसों और गर्म पत्थरों को मुख्य खतरा बताया है...
भूवैज्ञानिक एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया के मुताबिक जुलाई से अनक क्राकाटोआ में गतिविधियां बढ़ी हैं... लगातार हो रहे विस्फोट संकेत दे रहे हैं कि ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और ज्वालामुखीय गैसों की आपूर्ति बनी हुई है...
हालांकि, अधिकारी अभी यह अनुमान नहीं लगा सकते कि आगे कोई बड़ा विस्फोट होगा या नहीं...
फिलहाल किसी की मौत की खबर नहीं है और लोगों को निकासी का आदेश भी नहीं दिया गया है... लेकिन लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी गई है...
अनक क्राकाटोआ का नाम सुनते ही 1883 का वो खौफनाक इतिहास याद आता है... जब क्राकाटोआ के भीषण विस्फोट ने दुनिया को हिला दिया था...
1883 के विस्फोट का असर सिर्फ आसपास के इलाके तक सीमित नहीं रहा... इसके बाद वैश्विक मौसम पर भी असर पड़ा और दुनिया के कई हिस्सों में तापमान में बदलाव देखने को मिला...
लेकिन इस ज्वालामुखी का सबसे भयावह अध्याय साल 2018 में सामने आया... अनक क्राकाटोआ की गतिविधि के बाद समुद्र के भीतर भूस्खलन हुआ और ज्वालामुखी द्वीप का एक हिस्सा ढह गया...
इससे बड़ी मात्रा में पानी विस्थापित हुआ और सुनामी पैदा हुई...
2018 की उस सुनामी में सुमात्रा और जावा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी...
वैज्ञानिकों के मुताबिक उस घटना के बाद अनक क्राकाटोआ द्वीप अपने पुराने आकार का करीब एक-चौथाई रह गया था...
यानी इस ज्वालामुखी का इतिहास जितना पुराना है, उसका खतरा भी उतना ही गंभीर है...
फिलहाल अधिकारी लगातार ज्वालामुखी की निगरानी कर रहे हैं... राख के बादलों की दिशा, विस्फोटों की तीव्रता और ज्वालामुखीय गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है...
अनक क्राकाटोआ का ताजा विस्फोट भले ही अभी किसी बड़े नुकसान का कारण नहीं बना है... लेकिन राख का हजारों फीट ऊपर तक पहुंचना और सैकड़ों उड़ानों का प्रभावित होना खतरे की गंभीरता जरूर दिखाता है...
अब निगाह इस बात पर है कि ज्वालामुखी की गतिविधि आगे किस दिशा में जाती है... क्योंकि इतिहास गवाह है कि क्राकाटोआ की आग सिर्फ जमीन पर नहीं, समुद्र और आसमान तक अपना असर छोड़ चुकी है...