कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया गया। दोनों नेताओं की रिहाई के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल देखने को मिला। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित माफीनामा और शपथ पत्र जमा करने के बाद दोनों को जमानत पर रिहा किया गया। अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार, दोनों नेताओं ने लिखित आश्वासन दिया कि वे जंतर-मंतर स्थल को कानून के अनुसार गैर-अधिसूचित किए जाने तक शांति बनाए रखेंगे और वहां किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। इस आश्वासन के साथ उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और न्यायालय के निर्देशों का पालन करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर दोनों नेताओं की रिहाई पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने अंदाज में दोनों नेताओं को खुद से बहुत बड़ा नेता बताया और आदेशों का पालन करने की बात कही। पोस्ट में उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि अब उनके बिना बगीचे में कोई अकेला नहीं घूमेगा। उनकी इस टिप्पणी को दोनों नेताओं की रिहाई के संदर्भ में एक हल्के-फुल्के अंदाज में की गई प्रतिक्रिया के रूप में देखा गया।
कॉकरोच जनता पार्टी ने भी सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के संबंध में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश का स्वागत किया। पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय पहले ही आ जाना चाहिए था। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि पार्टी दोनों नेताओं की हिरासत और उनकी रिहाई की प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रख रही है।
गौरतलब है कि सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने जंतर-मंतर अतिक्रमण मामले की जांच पूरी होने तक दोनों कार्यकर्ताओं को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानत बॉन्ड जमा करने की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया।
अपने लिखित आश्वासन में दोनों नेताओं ने शांति भंग नहीं करने और निर्धारित शर्तों का पालन करने का वादा किया। साथ ही, उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के न्यायालय सहित न्यायपालिका और उसकी सभी संस्थाओं में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। इस प्रकार, सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई निर्धारित कानूनी शर्तों और लिखित आश्वासन के आधार पर हुई। अब जंतर-मंतर अतिक्रमण मामले की जांच पूरी होने तक दोनों नेताओं को दिए गए आश्वासन और जमानत की शर्तों का पालन करना होगा।