रिहाई के बाद दिपके ने कहा कि दिल्ली पुलिस की एक अजीब आदत है। पहले आपको हिरासत में ले लिया जाता है और पूरे समय वकील तक पहुंचने नहीं दी जाती। न आपको बताया जाता है और न ही किसी और को कि आपको कहां ले जाया जा रहा है। फिर रात के 3:30 बजे अचानक गिरफ्तारी के कागजात लेकर पहुंचते हैं और सुबह 4 बजे आपके वकील को फोन किया जाता है! मेरे साथ ऐसा दो बार हो चुका है। आखिर दिल्ली पुलिस के पास रात के 3:30 बजे ऐसा कौन-सा शुभ मुहूर्त होता है, जो गिरफ्तारी की कार्रवाई इसी वक्त करनी पड़ती है?