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ऊना में तेज धूप से घटने लगी खेतों की नमी, आलू की फसल को पहला पानी देने में जुटे किसान

जिला ऊना में पिछले चार-पांच दिनों से निकल रही तेज धूप ने खेतों में आलू की फसल की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के बाद अब धूप तेज होने से मिट्टी की नमी तेजी से कम होने लगी है। ऐसे में जिन किसानों ने करीब 10 से 12 दिन पहले आलू की बिजाई की थी, उन्होंने फसल को पहला पानी देना शुरू कर दिया है। किसान इस समय मौसम और खेत की नमी पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि शुरुआती अवस्था में आलू की फसल के लिए पर्याप्त नमी बेहद जरूरी है। बारिश के बाद जहां खेतों को नमी मिली थी, वहीं मेड़ों की ऊपरी सतह सख्त हो गई है। अब तेज धूप से नमी घटने लगी है, जिससे अंकुरण को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश से सख्त हो गई मेड़ों की ऊपरी परत किसान जीवन कुमार ने बताया कि आलू की बिजाई के बाद हुई बारिश के कारण मेड़ों की ऊपरी सतह सख्त हो गई है। जमीन के अंदर से निकलने वाले आलू के अंकुरों को इस सख्त परत को पार कर बाहर आने में समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि तेज धूप के कारण मिट्टी में मौजूद नमी भी तेजी से कम हो रही है। ऐसे में समय पर सिंचाई करने से मेड़ों की ऊपरी परत कुछ नरम होगी और अंकुरों को बाहर निकलने में मदद मिलेगी। उनके अनुसार फसल के शुरुआती दिनों में पर्याप्त नमी मिलना अच्छी बढ़वार के लिए महत्वपूर्ण है। मौसम पर किसानों की नजर किसान अश्वनी कुमार के मुताबिक इस समय किसान मौसम के हर बदलाव पर नजर रख रहे हैं। बारिश के बाद अचानक तेज धूप निकलने से खेतों में नमी का संतुलन प्रभावित हुआ है। इसलिए किसान जरूरत के अनुसार फसल की सिंचाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सिंचाई के बाद खेतों में खरपतवार भी तेजी से उभर सकते हैं। अगर इन्हें शुरुआती अवस्था में नियंत्रित नहीं किया गया तो ये आलू की फसल के साथ पानी और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। इससे फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। जरूरत से ज्यादा पानी भी नुकसानदायक कृषि प्रसार अधिकारी चंदन कुमार शर्मा ने किसानों को सिंचाई में सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आलू की फसल में पानी मिट्टी की नमी और मौजूदा मौसम की स्थिति को देखते हुए ही देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत से अधिक सिंचाई करने से खेत में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे फसल में रोग लगने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए किसान खेत की स्थिति देखकर ही सिंचाई करें। अधिकारी ने किसानों को सिंचाई के बाद उभरने वाले खरपतवार को भी समय रहते नियंत्रित करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि खरपतवारनाशक का इस्तेमाल फसल की अवस्था और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए। फिलहाल ऊना के किसान आलू की शुरुआती फसल को लेकर खासे सतर्क हैं। बारिश के बाद सख्त हुई मिट्टी और अब तेज धूप से घटती नमी के बीच किसानों की कोशिश यही है कि फसल का अंकुरण प्रभावित न हो और शुरुआती बढ़वार अच्छी बनी रहे।

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