हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, छात्र संघ चुनाव बहाल करने और विश्वविद्यालय में हुई कथित अवैध प्रोफेसर भर्तियों के विरोध में मंगलवार को एसएफआई रामपुर इकाई ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और विश्वविद्यालय के कुलपति महावीर वर्मा का पुतला फूंका। एसएफआई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी वित्तीय और प्रशासनिक कमियों का बोझ विद्यार्थियों पर फीस बढ़ाकर डाल रहा है। संगठन ने फीस वृद्धि को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। कैंपस उपाध्यक्ष मुकेश ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित वित्तीय नाकामियों का भार विद्यार्थियों पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि फीस बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो रहा है। एसएफआई के समीर ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय में वर्ष 2020 से 2022 के बीच 186 प्रोफेसरों की नियुक्तियों को कथित तौर पर गैर-कानूनी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नियुक्तियों से विश्वविद्यालय पर आर्थिक बोझ बढ़ा और अब इसका भार विद्यार्थियों पर फीस वृद्धि के माध्यम से डाला जा रहा है। हालांकि, इन नियुक्तियों को लेकर एसएफआई की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है। एसएफआई नेता चमन ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बंद होने के बाद विद्यार्थियों के पास अपनी समस्याएं और अधिकार उठाने के लिए लोकतांत्रिक मंच नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका फायदा उठाकर विश्वविद्यालय प्रशासन मनमाने और छात्र विरोधी निर्णय ले रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनावों को जल्द बहाल किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं उठाने के लिए लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मिल सके। एसएफआई नेताओं ने कहा कि पूर्व में किए गए आंदोलनों के दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बढ़ी हुई फीस के कुछ हिस्से में कटौती की है, लेकिन संगठन इससे संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि फीस वृद्धि को पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए। एसएफआई ने चेतावनी दी कि यदि फीस वृद्धि पूरी तरह वापस नहीं ली गई, कथित अवैध भर्तियों की जांच और कार्रवाई नहीं हुई तथा छात्र संघ चुनाव बहाल नहीं किए गए तो प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों में आंदोलन तेज किया जाएगा। संगठन ने कहा कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।