नौकरी छोड़कर गांव में उद्योग स्थापित करने की चार दोस्तों की पहल आज 70 लोगों की आजीविका का सहारा बन गई है। मंडी जिले की चच्योट तहसील के बाढू गांव में स्थापित हिल थ्रिल एग्रो प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड स्थानीय फल-सब्जियों का प्रसंस्करण कर 50 से अधिक उत्पाद तैयार कर रही है। कंपनी को वर्ष 2024 में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत 84 लाख रुपये का अनुदान भी मिला है। कंपनी के प्रबंध निदेशक खीरामणी ने अपने तीन साथियों भागीरथ चौहान, रविंद्र और इल्मदीन अली के साथ मिलकर गांव में ही उद्योग स्थापित करने की पहल की। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को घर के नजदीक रोजगार उपलब्ध करवाना और नौकरी के लिए दूसरे क्षेत्रों में पलायन की जरूरत कम करना था। जनवरी 2023 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद से इकाई का लगातार विस्तार हुआ है। इकाई में अचार, चटनी, जैम, फ्रूट वाइन, फ्रूट साइडर और एप्पल साइडर विनेगर सहित 50 से अधिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। स्थानीय फल एवं सब्जियों का प्रसंस्करण कर बनाए जा रहे इन उत्पादों की आपूर्ति हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में भी की जा रही है। इससे स्थानीय कृषि एवं बागवानी उत्पादों को बाजार मिल रहा है और कारोबार का दायरा भी बढ़ा है। प्रसंस्करण के जरिए फल-सब्जियों का मूल्य संवर्धन होने से स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का अवसर भी मिल रहा है। इकाई की शुरुआत 24 कर्मचारियों के साथ हुई थी। अब यहां काम करने वालों की संख्या बढ़कर 70 हो गई है। इनमें से 40 कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं मिल रही हैं। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, इकाई में स्थानीय युवाओं और अन्य लोगों को रोजगार के साथ अपने कौशल को बेहतर बनाने का अवसर भी मिल रहा है। गांव में ही काम उपलब्ध होने से कर्मचारियों को दूर के क्षेत्रों में नौकरी तलाशने की जरूरत कम हुई है। कंपनी के प्रबंध निदेशक खीरामणी ने बताया कि इकाई के विस्तार के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई थी। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2024 में 84 लाख रुपये का अनुदान मिला, जिससे उद्योग को आगे बढ़ाने में मदद मिली। ग्राम पंचायत बाढू की प्रधान सीता ठाकुर ने कहा कि क्षेत्र में प्रसंस्करण इकाई स्थापित होने से स्थानीय लोगों को घर के समीप रोजगार मिला है। कंपनी में कार्यरत कुटाहची निवासी जितेंद्र ठाकुर, चच्योट के गुंजन शर्मा और किलिंग निवासी कमल शर्मा ने भी घर के पास काम मिलने पर खुशी जताई। कमल शर्मा ने कहा कि रोजगार के साथ ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है। हिल थ्रिल एग्रो प्रोसेसर की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल से रोजगार सृजन की मिसाल बन रही है। फल-सब्जियों का प्रसंस्करण होने से कृषि एवं बागवानी उत्पादों का मूल्य संवर्धन हो रहा है। ऐसी इकाइयां स्थानीय लोगों को रोजगार देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान दे सकती हैं।