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कुल्लू: राजा की चाननी से शाही अंदाज में निकली भगवान नरसिंह की जलेब, हजारों श्रद्धालु बने साक्षी

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में रविवार को भगवान नरसिंह की चौथी जलेब शाही अंदाज में निकली। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, ढोल-नगाड़ों और नरसिंघों की गूंज के बीच निकली इस जलेब में बाह्य सराज के छह देवी-देवताओं ने भाग लिया। जलेब के दर्शन करने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। पूरे ढालपुर क्षेत्र में देव आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। शाम करीब 3:45 बजे ढालपुर स्थित दशहरा मैदान से जलेब का शुभारंभ हुआ। इसके बाद जलेब उपायुक्त कार्यालय, जिला अस्पताल, कलाकेंद्र, रथ मैदान और ढालपुर चौक से होकर गुजरी। भगवान नरसिंह की घोड़ी के आगे-पीछे देवलुओं और श्रद्धालुओं की भीड़ चलती रही। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। भगवान नरसिंह की चौथी जलेब में देव खुडीजल, व्यास ऋषि, देव कोट भझारी, टकरासी नाग, चोतरू नाग और विशलू नाग ने भाग लिया। बाह्य सराज के इन देवी-देवताओं की उपस्थिति ने जलेब की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को और बढ़ाया। भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार राजा महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार होकर जलेब में शामिल हुए। पारंपरिक देव संस्कृति और शाही अंदाज में निकली जलेब को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग ढालपुर पहुंचे। जलेब के दौरान ढोल-नगाड़ों, करनाल और नरसिंघों की धुनों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। पहाड़ी गीतों की धुन पर लोगों ने नाटी डालकर खुशी जताई। श्रद्धालुओं ने भगवान नरसिंह के दर्शन किए और कुल्लू की समृद्ध देव परंपरा का अनुभव किया। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में भगवान नरसिंह की जलेब यहां की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें देवी-देवताओं की भागीदारी, पारंपरिक वाद्ययंत्र और श्रद्धालुओं की उपस्थिति कुल्लू की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।

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