नगर निगम धर्मशाला के जनरल हाउस की बैठक में शिलान्यास पट्टिका पर महापौर का नाम नहीं होने को लेकर कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस पार्षद की ओर से यह मुद्दा उठाए जाने के बाद सदन में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। काफी देर तक इस मामले को लेकर नोकझोंक होती रही। बैठक में नगर निगम के पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए। पार्षदों ने नगर निगम की ओर से करवाए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी मांगी और संबंधित कार्यों को लेकर अपनी राय भी रखी। इसी दौरान विधायक की ओर से करवाए गए एक शिलान्यास की पट्टिका पर महापौर का नाम नहीं होने का मामला चर्चा में आ गया। कांग्रेस पार्षद ने शिलान्यास पट्टिका पर महापौर का नाम नहीं होने पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि नगर निगम क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के शिलान्यास के दौरान महापौर का नाम भी पट्टिका पर दर्ज होना चाहिए। उन्होंने सदन में इस विषय को उठाते हुए अपनी बात रखी। इस पर भाजपा पार्षदों ने भी जवाब दिया। दोनों पक्षों के बीच तर्क-वितर्क शुरू हो गया और मामला बैठक में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया। भाजपा पार्षदों ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि संबंधित विधायक को क्षेत्र की जनता ने चुनकर विधानसभा में भेजा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र के लोगों ने भी विधायक को समर्थन दिया है। भाजपा पार्षदों ने यह सवाल भी उठाया कि जब महापौर शमशेर नैहरिया को ही इस मामले में कोई आपत्ति नहीं है, तो कांग्रेस पार्षद की ओर से इसे मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है। इस दौरान दोनों पक्षों ने अपने विचार रखे और सदन में तीखी बहस हुई। वार्डों के विकास कार्यों पर भी हुई चर्चा जनरल हाउस की बैठक में शिलान्यास पट्टिका को लेकर बहस के अलावा नगर निगम के विकास कार्यों की समीक्षा भी की गई। पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों में चल रहे और प्रस्तावित कार्यों से जुड़े मुद्दे उठाए। बैठक में पार्षदों ने विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी मांगी और संबंधित योजनाओं को लेकर अपनी राय रखी। नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान पार्षदों ने अपने-अपने पक्ष सामने रखे।