हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए प्राकृतिक रूप से एक ऐसा बायोफर्टिलाइजर तैयार किया है जो काफी समय से बंजर से पड़ी जमीन को उपजाऊ बनाने में मदद करेगा और रासायनिक उर्वरक की निर्भरता भी कम करेगा। शोधार्थियों ने मिट्टी से विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया को एकत्र कर सिलिकेट सोलूबिलाइजिंग बैक्टीरिया आधारित कंसोर्टियम तैयार किया है। इस फर्टिलाइजर की खास बात यह है कि यह उच्च तापमान यानी 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक पर भी अपनी मौजूदगी बनाए रखता है। यह शोध जैव प्रौद्योगिकी विभाग के शोधार्थी बादल महाकालकर, पवन कुमार, वैभव यादव ने मिलकर किया है। इसमें जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रूपेश देशमुख का मार्गदर्शन रहा है। यह शोध वर्ष 2011 में शुरू हुआ था और इसकी शुरुआत तत्कालीन शोधार्थी गौरव रतूड़ी ने की। अब दूसरे चरण में वर्ष 2022 से इस शोध कार्य को पीएचडी स्कॉलर्स बादल महाकालकर, पवन कुमार व वैभव यादव ने सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने देश के विभिन्न जलवायु क्षेत्र जैसे लद्दाख, तमिलनाडु, महाराष्ट्र सहित अन्य क्षेत्रों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए और इनके विभिन्न स्रोतों से बैक्टीरिया का व्यापक संग्रह तैयार किया। प्रारंभिक चरण में विभिन्न नमूनों से 100 से 150 प्रकार के बैक्टीरिया पृथक किए गए। इसके बाद पौधों को पोषण प्रदान करने वाले लाभकारी बैक्टीरिया की पहचान कर उनका चयन किया गया। आगे की प्रक्रिया में इन बैक्टीरिया की अत्यधिक तापमान जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता की स्क्रीनिंग की गई। साथ ही ऐसे बैक्टीरिया का चयन किया गया जो एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाए बिना सह-अस्तित्व में वृद्धि कर सकें। अंत में संगत, पोषण प्रदाता व उच्च तापमान सहनशील बैक्टीरिया को मिलाकर 10 से 15 स्ट्रेंस का एक प्रभावी कंसोर्टियम बनाकर बायोफर्टिलाइजर तैयार किया गया।