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महेंद्रगढ़: चरित्र और निर्णय तय करते हैं जीवन की दिशा व दशा: सीजेआई सूर्यकांत

शाहिल शर्मा Updated Sat, 14 Mar 2026 05:16 PM IST

डिग्री केवल वर्षों की मेहनत से अर्जित किए गए ज्ञान की पुष्टि करती है, लेकिन किसी भी व्यक्ति के जीवन की असली दिशा और दशा उसके चरित्र व निर्णय लेने की क्षमता तय करते हैं। किसी प्रकार की उपाधि मिलने के बाद युवाओं को अपने शिक्षकों व परिजनों व देश के प्रति फर्ज को नहीं भूलना चाहिए। ये बातें सुप्रीम कोर्ट सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को महेंद्रगढ़ स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जब औपचारिक शिक्षा का ढांचा व्यक्ति के आसपास नहीं रहता, तब वही चरित्र और विवेक उसके मार्गदर्शक बनते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपने ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और सही निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित करना चाहिए। शिक्षा किसी भी व्यक्ति के लिए नए अवसरों के द्वार खोलती है। इससे उसकी क्षमताओं का विस्तार होता है और आय की संभावनाएं भी बढ़ती है। उच्च शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं है बल्कि इसके साथ समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की इमारतों का निर्माण, प्रयोगशालाओं का संचालन और शिक्षकों का वेतन उन संसाधनों से संभव होता है जो जनता के कर से जुटाए जाते हैं। देश के लाखों ऐसे नागरिक हैं जो स्वयं विश्वविद्यालय तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन उनके दिए गए कर से ही उच्च शिक्षा की व्यवस्था संचालित होती है। साथ ही युवाओं को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझने की नसीहत दी। कहा कि न्यायपालिका, सिविल सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन आदि सार्वजनिक संस्थाओं को मजबूत बनाना चाहिए।

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