जुलाना खंड के अंतर्गत आने वाले गांव देवरड़ में उस समय हड़कंप मच गया जब मनरेगा के तहत तालाब की खुदाई कर रहे मजदूरों को तालाब में नर कंकाल और प्राचीन काल के मटके मिले। नर कंकालों को देखकर मजदूर डर गए। गांव देवरड़ में मनरेगा के तहत गांव के तालाब की खुदाई का कार्य चल रहा था। मजदूरों को खुदाई के दौरान अचानक कुछ मटके दिखाई दिए। जब उन्हें और गहराई में खोदा गया तो वहां मानव कंकाल भी बरामद हुए। तालाब में लगभग 10 से 12 कंकाल अब तक मिल चुके हैं। कंकाल की लंबाई सामान्य से ज्यादा तालाब में मिले कंकालों की लंबाई सामान्य से ज्यादा है। खुदाई के दौरान मिले मानव जबड़े भी काफी बड़े हैं। अंदाजा लगाया जा रहा है कि कंकाल की लंबाई लगभग 8 फीट है। कंकालों की हालत को देखकर लगता है कि ये लगभग 200 साल पुराने हैं। तालाब की जगह था कब्रिस्तान देवरड़ गांव निवासी राममेहर ने बताया कि आजादी से पहले गांव में मुसलमान रहते थे। गांव के तालाब की जगह कब्रिस्तान होता था। तालाब में मिल रहे कंकाल कब्रिस्तान में दफनाए गए मुस्लिमों के हो सकते हैं। बुजूर्गाें ने बताया कि आजादी के बाद भी इस जगह लोग आने से कतराते थे। समय बीतता गया और यहां पर तालाब बन गया। देवरड़ गांव में मनरेगा स्कीम के तहत तालाब की खुदाई की जा रही है। तालाब में खुदाई के दौरान कंकाल मिले हैं तो काम को रोक दिया है और मौके पर जाकर जांच करने के बाद ही काम दोबारा शुरू किया जाएगा। -प्रतीक जांगड़ा, बीडीपीओ जुलाना।