गुभाना। गांव गुभाना स्थित लोकहित पुस्तकालय में सोमवार को महान क्रांतिकारी शहीद शिवराम हरि राजगुरु की जयंती मनाई गई। समिति सदस्यों और ग्रामीणों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश की आजादी के लिए उनके बलिदान को याद किया। समिति अध्यक्ष नरेश कौशिक ने शहीद राजगुरु के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 24 अगस्त 1908 को महाराष्ट्र के पुणे जिले के खेड़ में हुआ था, जिसे अब राजगुरुनगर के नाम से जाना जाता है। उनके पिता का नाम हरिनारायण राजगुरु और माता का नाम पार्वती देवी था। राजगुरु बचपन से ही देशभक्ति की भावना से प्रेरित थे और आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ गए। उन्होंने बताया कि 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सांडर्स की हत्या की थी। इस कार्रवाई में भगत सिंह और राजगुरु प्रमुख रूप से शामिल थे। यह कार्रवाई लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज का बदला लेने के उद्देश्य से की गई थी। घटना के बाद भगत सिंह, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद पुलिस से बच निकलने में सफल रहे। राजगुरु को भगत सिंह और सुखदेव के साथ देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले महान क्रांतिकारियों के रूप में याद किया जाता है। ब्रिटिश सरकार ने 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी थी। देशभर में हर वर्ष उनके बलिदान को श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। इस अवसर पर सूबेदार मेजर सुरेश कुमार, जय भगवान प्रधान, पहलवान रामकुमार, सतवीर सिंह, सुनील कुमार, दलजीत सिंह, अंकित, लविश और दीपक कौशिक सहित समिति सदस्य व ग्रामीण मौजूद रहे।