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फतेहाबाद: मनरेगा मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को दिया ज्ञापन

शाहिल शर्मा Updated Mon, 29 Dec 2025 03:19 PM IST

मनरेगा मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नाम एसडीएम आकाश शर्मा को ज्ञापन दिया है। उन्होंने कहा कि देश-भर के मनरेगा मज़दूर, श्रमिक संगठन और ग्रामीण नए कानून, 2025 का कड़ा विरोध करते हैं। मनरेगा 2005 एक कानूनी, मांग-आधारित और विकेंद्रीकृत अधिकार है, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों- विशेषकर महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और भूमिहीन मज़दूरों को आजीविका की सुरक्षा देता था। उन्होंने कहा कि इस कानून से अधिकार को समाप्त कर मनरेगा को बजट-नियंत्रित "योजना" में बदल देता है। काम, बजट और प्राथमिकताएँ केन्द्र से तय होंगी यानी पहले बजट, फिर काम, जो मनरेगा की आत्मा पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि 60:40 लागत-साझेदारी से राज्यों पर बोझ डालकर गरीब राज्यों में काम ठप्प होगा, बेरोज़गारी और पलायन बढ़ेगा। कृषि मौसम में 60 दिन काम पर रोक, तथा बायोमेट्रिक-डिजिटल नियंत्रण, मज़दूरों के अधिकारों और 73वें संविधान संशोधन के तहत स्थानीय स्वशासन को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक बिना मज़दूरों, ग्राम सभाओं और श्रमिक संगठनों से परामर्श के लाया गया है। हमें न कानून का नाम बदलना चाहिए, न अधिकार।उन्होंने मुख्य मांगे में कहा कि नए बिल, 2025 को तुरंत वापस लिया जाए, मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में पूरी तरह पुनः लागू किया जाए, मनरेगा में काम के दिन बढ़ाये जाये व 800 रुपये न्यूनतम मज़दूरी तय किया जाए

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