गावों के लिए अब एक नया मोबाइल, खत्म होगा अंग्रेजी का दबदबा

शहरों से दूर गावों के लिए अब एक नया मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम अपना रंग जमाने की कोशिश कर रहा है। इंडस ओएस अब भारत समेत दूसरे देशों में ऐसे लोगों तक अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को पहुंचाने की कोशिश कर रहा है जो एंड्रायड का स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं क्योंकि वो अंग्रेजी में है।
इंडस ओएस 12 भाषाओं में मिलने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है जो हाल में लॉन्च किए गए माइक्रोमैक्स के मोबाइल में मिल सकता है। दूसरे कई कम कीमत वाले स्मार्टफोन में भी ये ऑपरेटिंग सिस्टम अब दिखाई देने लगा है।लेकिन ये ऐसे बाज़ार तक पहुंच रहा है जहां एंड्रायड और गूगल का ही एंड्रायड वन नहीं पहुंच पाए हैं।
क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले लोगों तक पहुंचने का रास्ता सिर्फ़ यही हो सकता है क्योंकि अंग्रेजी उन्हें आती नहीं है। भारत के स्मार्टफोन के बाज़ार में एंड्रायड का 80 फ़ीसदी से बड़ा हिस्सा है लेकिन उसके बाद भी इंडस को अपने लिए बाज़ार मिल रहा है।
12 भाषाओं में काम करने वाला स्मार्टफोन

बड़े शहरों में स्मार्टफोन के बाज़ार के बढ़ने की रफ़्तार अब थोड़ी धीमी हो गयी है क्योंकि ये कई लोगों के पास हैं। कुछ लोगों के पास दो स्मार्टफोन भी हैं। लेकिन चूंकि गावों में स्मार्टफोन की भाषा अंग्रेज़ी में है इसलिए लोगों के बीच काफ़ी लोकप्रिय नहीं हो पा रहा है। इंडस ओएस वाले स्मार्टफोन इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
टेक्स्ट टू स्पीच फीचर यानी स्मार्टफोन में बोलिये और वो खुद टाइप कर ले, इस फ़ीचर ने लोगों के लिए इसे काफ़ी आसान बना दिया है। 12 भाषाओं में काम करने वाले ये स्मार्टफोन का ओएस और भाषा में भी जल्दी मिलेगा।
भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत ये काफ़ी अहम हो सकता है। अगले पांच साल में इंडस ओएस को उम्मीद है कि 30 करोड़ लोग इस ऑपरेटिंग सिस्टम को इस्तेमाल कर रहे होंगे।
इंडस ओएस के ऐप बाज़ार में सिर्फ़ 45,000 ऐप

इंडस ओएस के ऐप बाज़ार में सिर्फ़ 45,000 ऐप हैं जो कि एंड्रायड के करीब 17 लाख से कहीं कम हैं। लेकिन सबसे पसंदीदा 100 में से 45 फ़िलहाल बाज़ार में हैं और कंपनी की कोशिश है कि ये सभी ऐप इस साल के अंत तक उनके बाजार में हों।
सॉफ़्टवेयर बनाने वाली कंपनियां स्मार्टफोन पर ध्यान देती हैं क्योंकि उसमें कई फ़ीचर दिए जा सकते हैं। चूंकि वो कनेक्टेड होते हैं इसलिए फ़ोन कंपनियां भी ऐसे ज़्यादा से ज़्यादा फ़ोन अपने नेटवर्क पर चाहती हैं ताकि लोग उन्हें इन्टरनेट डिवाइस के रूप में इस्तेमाल कर सकें।
भारत में 100 करोड़ से भी ज़्यादा मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों में सिर्फ़ 40 करोड़ ऐसे हैं जो मोबाइल इन्टरनेट इस्तेमाल करते हैं। ऐसा माना जाता है कि बाकी के 60 करोड़ लोगों में ज़्यादातर ऐसे लोग हैं जो भारतीय भाषाओँ में स्मार्टफोन इस्तेमाल करना पसंद करेंगे।