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देवी माँ की मेहरबानी

Yatiraj Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कैसे बयां करूँ महिमा माँ की
        
                                                    
                            
ये साँसे चल रही माँ की मेहरबानी से ।

जब-जब मुसीबत आई सर पे
सरक गई परे माँ की मेहरबानी से ।

जब-जब रोई माँ के दरबार में
मुस्कुरा के निकली माँ की मेहरबानी से ।

ज़माने के ज़ख्म दिखाये दरबार में
मरहम के साथ निकली माँ की मेहरबानी से ।

किराए के घरों में भटक रहे थे
अपना ठिकाना बना माँ की मेहरबानी से ।

कितने हादसों से बच के निकले
करिश्मा हो गया माँ की मेहरबानी से ।

- यतिराज बजाज "प्रेरणा"
2 वर्ष पहले
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