विज्ञापन

राखी रंगबिरंगे रेशम के धागे नहीं

vijaya Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राखी रंगबिरंगे रेशम के धागे नहीं,
        
                                                    
                            
स्नेह का संबंध ,
रक्षासूत्र एक दूजे का,
एक ही आंगन में शैशव बीता
खेले, लड़े, पढ़े,
समय की चाल,
आंगन वहीं शिशु कब किशोर किशोरी बन ठिकाना अपना अपना
हो जाता,
विवाह नौकरी के लिए हो जाते विलग,
पर्व राखी का भाई बहन के नाम,
दूर शहर से राखी बांधने आती,
राखी रंगबिरंगे रेशम के धागे नहीं,
बंधी जिम्मेदारी और स्नेह,
रीति रिवाजों में भाई,
बहन देहरी पर टकटकी लगाए बैठी,
बिन भाई के भात की रस्म नहीं,
बहन के पांव पूजे भाई,
भाई का वैभव बहन का गौरव,
बहन को सबल बनाए,
अंधियारों से बचाए,
आगे बढ़ने के मार्ग प्रशस्त करे,
राखी रंगबिरंगे रेशम के धागे नहीं,
भाई पूनम का चांद,
बहन चांदनी,
दोनों से होता उजियारा,
बढ़ाए कुल की मान मर्यादा।
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile