विज्ञापन

कुलबुलाते रहे

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आँखों में बस गए वो आँसू की तरह।
        
                                                    
                            
यादों में कुलबुलाते बुलबुले की तरह।।

कभी खुशी बनकर कभी दर्द बनकर।
बिन मौसम बरसते बरसात की तरह।।

रूह ने रूह को पहचाना है 'उपदेश'।
संघर्ष जारी धरती आकाश की तरह।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile