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कुलबुलाते रहे

                
                                                         
                            आँखों में बस गए वो आँसू की तरह।
                                                                 
                            
यादों में कुलबुलाते बुलबुले की तरह।।

कभी खुशी बनकर कभी दर्द बनकर।
बिन मौसम बरसते बरसात की तरह।।

रूह ने रूह को पहचाना है 'उपदेश'।
संघर्ष जारी धरती आकाश की तरह।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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1 hour ago

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