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हर बाधा पार न होगी किसके उद्गार में रही।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जुल्म हो जाएगा अगर धोखे में रही।
        
                                                    
                            
मासूम चेहरा देखकर तूँ उधर में रही।।

वो किस तरह निसार रहा गुलाब पर।
भंवरा बैठा न रहेगा अगर खुमार में रही।।

फिर क्या बचेगा तपना पड़ेगा बेवजह।
बैरागन बनकर तड़पाने के गुबार में रही।।

ना ताबीज काम आएगा ना पीर-फकीर।
इलाज भी ना पाएगी अगर अख्तर में रही।।

बस 'उपदेश' स्मरण रहेगा अंतर्मन में सदा।
हर बाधा पार न होगी किसके उद्गार में रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
12 घंटे पहले
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