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हर बाधा पार न होगी किसके उद्गार में रही।।

                
                                                         
                            जुल्म हो जाएगा अगर धोखे में रही।
                                                                 
                            
मासूम चेहरा देखकर तूँ उधर में रही।।

वो किस तरह निसार रहा गुलाब पर।
भंवरा बैठा न रहेगा अगर खुमार में रही।।

फिर क्या बचेगा तपना पड़ेगा बेवजह।
बैरागन बनकर तड़पाने के गुबार में रही।।

ना ताबीज काम आएगा ना पीर-फकीर।
इलाज भी ना पाएगी अगर अख्तर में रही।।

बस 'उपदेश' स्मरण रहेगा अंतर्मन में सदा।
हर बाधा पार न होगी किसके उद्गार में रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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9 घंटे पहले

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