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हँसना मत छोड़ो

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनों को मनाने की जिद्द छोड़ो।
        
                                                    
                            
रूठे बैठे हैं जो उन्हें और मत छेड़ो।।

बांटना चाहते हैं ज़माने की खुशियाँ।
उनको इस तरह अकेला मत छोड़ो।।

कभी-कभी मिलने आ जाते घर पर।
मायूस चेहरों को हंसाना मत छोड़ो।।

चल न दे कहीं गाँव को छोड़कर वो।
मिल बांट कर खाओ प्रेम मत छोड़ो।।

नजर से नजर मिलते नही 'उपदेश'।
दिल मिलाने की कोशिश मत छोड़ो।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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