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जल प्रलय शैतां

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जल प्रलय शैतां,,
        
                                                    
                            
लो फिर मानव का
दानव रूप अब सारी
दुनिया को मुंह चिड़ा
रहा।
यूं तो वो विश्व की
सबसे पुरानी सभ्यता
का बाशिंदा रहा,
पर उसके हाथ में
सदैव ही विस्तारवाद
का फंदा रहा।
प्रकृति को काट पीट,
जल प्रलय के बम
बनाना उसका प्रिय
धंधा रहा।
आख़िर रक्ष संस्कृति
की श्रृंखला का
वो एक शाश्वत कुंडा रहा।
सारे विश्व में विकार का
कूड़ा फैलाना,
और अपना स्वार्थ
साधना,
उसका प्रिय शगली
धंधा रहा।
डरा धमका औ प्रकृति से
सामूहिक हत्या करवाना भी
उसकी कार्यसंस्कृति
का फंडा रहा।
कुल मिलकर आज भी
वो शैतान का बंदा रहा।

-सूर्यकांत शर्मा
13 घंटे पहले
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