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आज मन क्यों उदास है

Surya Barman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज़ मन क्यों उदास है,
        
                                                    
                            
जो मन कभी पवन के झोंके बन के झूमता था,
जो मन समंदर सा विशाल था,
अपनी शीतलता से हर एक जले मन को ठंढक पहुचाता था।

सदैव पुलकित रहता था
आज उसके हृदय पर आघात है।
आज़ मन क्यों उदास है।
जो मन औरों की खुशियों में अपनी खुशी तलाशता था

खुद का दिल जला कर औरों का घर रोशन करता था
उसकी रोशनी में अपनी खुशी ढूंढता था
सदैव हंसता खिलखिलाता था
आज वही हताश है

आज़ मन क्यों उदास है
जो मन स्फूर्ति लिए हुए
अच्छाई के तरफ़ भागता था
इमानदारी का पाठ पढ़ाता था
अपनी साहस से हर मुसीबत का सामना करता था।
चट्टानों से टकराने की हौसला रखता था,
ए समय-समय की बात है।
आज़ मन क्यों उदास है।

जो मन बड़ी ही सहजता से,
अपनी गृहस्थी संभालता
स्वस्थ चिंतन करते हुए
अपने जीवन पथ पे आगे बढता।

औरों को भी मुल्य वान सुझाव देता।
उसे अपने आप पे भरोसा और विश्वास था,
आज वही निराश हैं।
आज़ मन क्यों उदास है।

जो मन याचना भरी आंखों से,
कंपकंपाते हुए होंठों से
प्रती दीन सबके भले की
वो कामना करता रहता था।
हे मेरे आराध्य देव,

अपनी आराध्या के साथ ऐसा क्यों किया,
कलेजा निकाल लिया
एक बहन के लिए बहुत बड़ा आघात है,
आज़ मन क्यों उदास है।
-करुणा ” तिवारी
 
एक महीने पहले
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