जब सहारनपुर
डाउन पैसेंजर
लखनऊ को छूटी थी
क्रांतिकारियों के दिलों में
अँग्रेजो से नफरत फूटी थी
वह काकोरी स्टेशन था
जहाँ रोककर ट्रेन
लूटी थी
तब दहल गई अंग्रेजों की
हुकूमत की हिम्मत टूटी थी
बिस्मिल थे ,आजाद थे ,
रोशन और अशफाक थे
क्रांतिकारिओं का साथ लिये
वे वीर हमारे जांबाज़ थे ॥
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