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9th अगस्त 1925

                
                                                         
                            जब सहारनपुर
                                                                 
                            
डाउन पैसेंजर
लखनऊ को छूटी थी
क्रांतिकारियों के दिलों में
अँग्रेजो से नफरत फूटी थी
वह काकोरी स्टेशन था
जहाँ रोककर ट्रेन
लूटी थी
तब दहल गई अंग्रेजों की
हुकूमत की हिम्मत टूटी थी
बिस्मिल थे ,आजाद थे ,
रोशन और अशफाक थे
क्रांतिकारिओं का साथ लिये
वे वीर हमारे जांबाज़ थे ॥


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6 वर्ष पहले

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