विज्ञापन

हुआ सबेरा

subhash yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हुआ सवेरा
        
                                                    
                            
हटा अँधेरा
पंछी देखो चहक रहे हैं
बह रही है हवा ठंडी
पुष्प देखो महक रहे हैं
बिस्तर छोडो बबलू -डब्लू
बच्चे बकरी के फुदक रहे हैं
कभी दीवार पर
चढ़-उतर कर
जानबूझकर लुढ़क रहे हैं
आलस छोड़ो
तुम भी खेलों
जैसे वे भी हंस रहे हैं ॥



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile