आंगन में उतर
कोई चारपाई के सिरहाने
कोई नीचे बैठ तो कोई फुर्र से उड़कर
बैठ डारे से चहचहाने लगी
देख जिन्हे माँ बड़बड़ाने लगी
मुठ्ठी भर दाना भीतर से ले आयी
मानेंगी नहीं चिरैया
पंख फड़फड़ाने लगी
दरअसल बहुत
ख्याल करती है माँ
हरदिन चिरईयो का इंतज़ार
करती है माँ
एक रिश्ता है संग उनसे
बहुत स्नेह करती है माँ II
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