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चिरैया

subhash yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आंगन में उतर
        
                                                    
                            
कोई चारपाई के सिरहाने
कोई नीचे बैठ तो कोई फुर्र से उड़कर
बैठ डारे से चहचहाने लगी
देख जिन्हे माँ बड़बड़ाने लगी
मुठ्ठी भर दाना भीतर से ले आयी
मानेंगी नहीं चिरैया
पंख फड़फड़ाने लगी
दरअसल बहुत
ख्याल करती है माँ
हरदिन चिरईयो का इंतज़ार
करती है माँ
एक रिश्ता है संग उनसे
बहुत स्नेह करती है माँ II


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