सावन की सतरंगी स्मृतियां,
शुक्ल दिवस विस्तार
थालें सजाकर बैठी बहना,
भरकर हृदय में प्यार।
अमृत भरी मुस्कान लबों पर,
गूंजे स्नेह और प्यार।
बहन दुआएं मांगे रब्ब से,
जीये भाई वर्ष हजार।
रेशम की एक डोर ने मानो,
बांधा सकल संसार,
विश्वास के कोमल धागे ने,
कर दी कलाई गुलज़ार।
रक्षा का संकल्प थामें हैं
रिश्तों की मधुर झनकार।
भाई बहन के पावन रिश्तों की
राखी दिवस प्रसार।
प्रेम के पथ को रोशन करता,
सुलभ शुक्ल अभिसार।
रिश्तों की नैया खेता
रक्षाबंधन का त्योहार।
-संतराम शर्मा 'हिन्दी'