बदले शासन बदले नेता,
बदली कई सरकार है।
नहीं बदला तो चित्र एक,
कि बाढ़ में ये बिहार है।
कोसी, गंडक गरज रही है,
जीवन है मजधार में।
सपने हम सब देखते रहे,
संकल्प सदा करते ही रहे,
फिर ,चूक हुई किस मोड़ पर,
पुल भी ध्वस्त पंक्ति वार हैं।
चांद पे आशियाना बनाने चले,
अपने बिहार को बचा ना सके।
सब कुछ साधने में सफल रहे,
क्यों असम ,बिहार डूबते रहे।
किस बात का होता शंखनाद,
कोसी बांधने में जब विफल रहे।
कब तक का ये इंतजार है,
कितनी पीढ़ियां निकल गईं,
पर मंजर सदा वही दिखता,
जलधार में ये बिहार है।