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तपिश

S Prakash

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूर्य की तपिश
        
                                                    
                            
और
गर्म हवाओं ने 
मुझे
निर्वस्त्र कर दिया है
मुझे
पतझड़ समझने की भूल न करो
क्योंकि
मैं
तुम्हारे ही 
अस्तित्व की एक पहचान हूँ।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले
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