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हमें अच्छी नहीं लगती

Pushpendra Pushp

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रक़ीबों से शनासाई हमें अच्छी नहीं लगती
        
                                                    
                            
मोहब्बत की ये रुसवाई हमें अच्छी नहीं लगती

खुशी में संग रहते हो तो दुख में भी रहो शामिल
फ़क़त झूठी पज़ीराई हमें अच्छी नहीं लगती

कभी ख़ुद को परे रख कर ज़माने की तरफ़ देखो
ये ख़ुदग़र्ज़ी ये दानाई हमें अच्छी नहीं लगती

किनारे पर खड़े हो तुम इधर मँझधार में हम हैं
बनावट की मसीहाई हमें अच्छी नहीं लगती

अगर है चाँद सा चेहरा तो मन भी ख़ूबसूरत हो
किनारे पर जमी काई हमें अच्छी नहीं लगती

निकल कर जिस्म की मस्ती के बाहर रूह भी झाँको
ये बे-मौसम की अंगड़ाई हमें अच्छी नहीं लगती
-पुष्पेंद्र 'पुष्प'
17 घंटे पहले
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