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अब भी मैं याद करता हुं

Priti Gautam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बेमतलब की तेरी बातों को,
        
                                                    
                            
ना जाने क्युं
अब भी मैं याद करता हुं।
यादों में खो कर तेरी,
मैं खुद से ही तेरी बात करता हुं ।
बेवजह मुस्कुराने लग जाता हुं,
ना जाने क्युं जब भी
मैं तेरा ख्याल करता हुं।
खुद में उलझकर,
मैं खुद से ही सौ सवाल करता हुं ।
मेरे दिल को चाह है तेरी, क्या इसलिए
मैं तेरी परवाह करता हुं।
नहीं जानता मैं की ,
ना जाने क्युं बेतहाशा
मैं तुझसे प्यार करता हुं।
एहसास कम हो सकता नहीं,
तेरे बिन ये दिल कही लगता नहीं।
तेरी यादों में खो कर,
मैं हर- एक लम्बी रात करता हुं।
बेमतलब की तेरी बातों को,
ना जाने क्युं, अब भी
मैं याद करता हुं।।
-प्रीति गौतम
एक महीने पहले
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