गमले में फूल नहीं टमाटर उगाइये,
फूल और फल का आनंद लीजिए।
आहार में रसायन खाद से बचिए,
खाने की चीजों को हाथों से उगाइये।।
मिलावट से बचे किसी पर भरोसा न करे,
जो फूल गमलों में सुंदरीकरण में लगाते है।
उसकी जगह गमले में अब सब्जियां उगाइये,
सब्जियों के फूल भी अच्छे दिखाई पड़ते हैं।।
आतंकी भोजन से स्वयं को बचाए,
बिना गौर से निर्देशों को पढ़े जांचे,
डिब्बा बंद खाद्य उत्पाद नहीं खरीदे।
जीभ पर लगाम, पेट को आराम दिलाए।।
अपने से अपने भरोसे में विश्वास जताए,
बाजार के भरोसे पर भरोसा कम ही जताए।
थाली में बाज़ार का ध्यान जेब पर होता है,
थाली में घरवाली का ध्यान पेट पर होता है।।
पहले रसोई में 20 फीसदी सामान बाहरी होता था,
आज वहीं उसकी धार 80 फीसदी से ज्यादा है।
भोजन में स्वाद के आतंक का आतंक देखिए,
अब भोजन रसोई में कम बाज़ार में ज्यादा बनता है।।
बाहर से खाना मंगाना आसान लगता है,
घर में खाना बनाना अब दुश्वार लगता है।
जीभ और आलस्य के चक्कर में प्रदीप,
हम आतंकी भोजन का शिकार हो रहे हैं।।