आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आतंकी भोजन

                
                                                         
                            गमले में फूल नहीं टमाटर उगाइये,
                                                                 
                            
फूल और फल का आनंद लीजिए।
आहार में रसायन खाद से बचिए,
खाने की चीजों को हाथों से उगाइये।।

मिलावट से बचे किसी पर भरोसा न करे,
जो फूल गमलों में सुंदरीकरण में लगाते है।
उसकी जगह गमले में अब सब्जियां उगाइये,
सब्जियों के फूल भी अच्छे दिखाई पड़ते हैं।।

आतंकी भोजन से स्वयं को बचाए,
बिना गौर से निर्देशों को पढ़े जांचे,
डिब्बा बंद खाद्य उत्पाद नहीं खरीदे।
जीभ पर लगाम, पेट को आराम दिलाए।।

अपने से अपने भरोसे में विश्वास जताए,
बाजार के भरोसे पर भरोसा कम ही जताए।
थाली में बाज़ार का ध्यान जेब पर होता है,
थाली में घरवाली का ध्यान पेट पर होता है।।

पहले रसोई में 20 फीसदी सामान बाहरी होता था,
आज वहीं उसकी धार 80 फीसदी से ज्यादा है।
भोजन में स्वाद के आतंक का आतंक देखिए,
अब भोजन रसोई में कम बाज़ार में ज्यादा बनता है।।

बाहर से खाना मंगाना आसान लगता है,
घर में खाना बनाना अब दुश्वार लगता है।
जीभ और आलस्य के चक्कर में प्रदीप,
हम आतंकी भोजन का शिकार हो रहे हैं।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर