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कोलकाता की बस दौड़

NAGMANI KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज हमने देखा एक दौड़
        
                                                    
                            
उसमें हम भी सवार थे,
लगा झटका, गिरा बच्चा,
औरत चिल्लाई,
यह है शहर की बस दौड़।
बस खुलती है, सिंगल खाती है,
बैलगाडी की चाल चलती हैं,
तभी समान नंबर की बस आती है,
बुलेट ट्रेन बन जाती हैं।
कोई पिसे, कोई मरे
टांग टूटे, हाथ घिसे
बस एक हैं लक्ष्य
मेरा बस सबसे आगे।
कानून हैं, चालान है
ट्रैफिक पुलिस हैं, सिंगल है
पर सब बेवस हैं,
क्योंकि टिकट पर कमीशन है।
 
4 घंटे पहले
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