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रक्षा बंधन: एक पावन त्योहार

Mednikant Jha

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                            रक्षा बंधन: एक पावन त्योहार
        
                                                    
                            

भाई-बहन के अद्भुत संबंधों का प्रतीक,
रक्षा बंधन का शुभ त्योहार!
एक सूत्र में पिरोता यह पावन पर्व—
संबंध को, परिवार को, समाज को, देश को!

यह पर्व,
पवित्रतम प्यार का,
द्रौपदी के स्नेह का,
कृष्ण के वचन का,
और उस रक्षा-वचन की अमर गरिमा का!
यह पर्व,
कच्चे धागे में बंधे खास रिश्ते का,
और कराता है एहसास,
भाई-बहन के प्रेम में,
रिश्तों की अनंत गहराई का!
यह पर्व,
सावन की पूर्णिमा के दिन का,
कुमकुम-अक्षत का,
दीपक और आरती की थाली का,
रक्षा-सूत्र और मिठाई का,
बहन के असीम प्यार का,
भाई के अप्रतिम स्नेह का,
अनोखे रिश्ते का!
इस त्योहार में,
रोली-अक्षत का तिलक,
कलाई पर रक्षा-सूत्र,
लंबी उम्र की कामना,
भाई का उपहार,
और हर परिस्थिति में रक्षा का वचन!

है त्योहार,
स्नेह, अपनत्व और विश्वास की—
अटूट डोर का,
है इसमें,
बंधन प्यार का,
रिश्तों का,
स्नेह और सम्मान का,
धर्म का,
संस्कार का,
संबंध का,
यादों का!
है त्योहार-
लंबे इंतज़ार का,
कभी,
टूटे हुए रिश्तों को,
फिर से सहेजने का,
कभी आँखों में चमक,
तो कभी अश्रुधार!
इसमें जुड़ी हैं—
बचपन की मीठी यादें,
बहन की नन्हीं-नन्हीं शरारतें,
छोटी-सी बातों पर,
दोनों का लड़ना और झगड़ना,
बहन का रूठना और भाई का मनाना,
अनोखा रिश्ता,
भाई-बहन का अटूट प्रेम,
पवित्र धागे में सिमटा स्नेह अपार!

 
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