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कलाकारी

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्दों की कर लेते हैं थोड़ी सी कलाकारी
        
                                                    
                            
वरना इस नामुराद दुनिया में, हैसियत क्या है हमारी

शब्दों के हम बाण चलाएं, शब्द तलवार दोधारी
सत्य निष्प्राण न हो दुनिया में, ये अपनी जिम्मेदारी

ग़ालिब हमारे दिल में है, गुलजार से है यारी
करते हैं इनकी बंदगी, ये है मिल्कियत हमारी

दुनिया का कुछ तजूर्बा है, कुछ इश्क़ की बीमारी
भटके तमाम उम्र हम, ये ही नौकरी हमारी
3 वर्ष पहले
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