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कलाकारी

                
                                                         
                            शब्दों की कर लेते हैं थोड़ी सी कलाकारी
                                                                 
                            
वरना इस नामुराद दुनिया में, हैसियत क्या है हमारी

शब्दों के हम बाण चलाएं, शब्द तलवार दोधारी
सत्य निष्प्राण न हो दुनिया में, ये अपनी जिम्मेदारी

ग़ालिब हमारे दिल में है, गुलजार से है यारी
करते हैं इनकी बंदगी, ये है मिल्कियत हमारी

दुनिया का कुछ तजूर्बा है, कुछ इश्क़ की बीमारी
भटके तमाम उम्र हम, ये ही नौकरी हमारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

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