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बेमौसम बरसात

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहीं तो कोई बात हुई है
        
                                                    
                            
बेमौसम बरसात हुई है।

दिल ही दिल रो रहा है कोई
पृत में कोई घात हुई है।

बिछड़ा है कोई मीत से अपने
नयनों से बरसात हुई है।

कहीं तो कोई बात हुई है।

सुबह से नहीं गया निवाला
किसी गरीब के उदर में ज्वाला,
भिक्षा मांग रहा है सड़क पर,
भूख से शर्म की हार हुई है।

बेमौसम बरसात हुई है।

ग़म का अंधियारा है छाया
बड़ी अंधेरी रात हुई है।

रुग्ण शरीर की पीड़ा से
कोई रुह आजाद हुईं है।

कहीं तो कोई बात हुई है
बेमौसम बरसात हुई है।
3 वर्ष पहले
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