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अपना घर

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चहकते बच्चों से सजता है घर
        
                                                    
                            
महकते प्रेम से रचता है घर
अपनों का साथ हो तो,
अभाव में भी हंसता है घर,
वैसे तो बहुत मकान है इस जहां में,
पर हर मकान घर नहीं होता,
घर वो होता है,
जहां दर-बदर होने का डर नहीं होता
एक अमिट रिश्ता है घर,
कभी न मुरझाए वो गुलिस्तां है घर
3 वर्ष पहले
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