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अपना घर

                
                                                         
                            चहकते बच्चों से सजता है घर
                                                                 
                            
महकते प्रेम से रचता है घर
अपनों का साथ हो तो,
अभाव में भी हंसता है घर,
वैसे तो बहुत मकान है इस जहां में,
पर हर मकान घर नहीं होता,
घर वो होता है,
जहां दर-बदर होने का डर नहीं होता
एक अमिट रिश्ता है घर,
कभी न मुरझाए वो गुलिस्तां है घर
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3 वर्ष पहले

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