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कलम बेचैन हो उठती है

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब भी अकेले में
        
                                                    
                            
सोचती हूं
किसी की बातें
अंधेरी रातें
दिन के उजाले
धरती बनाने वाले
ईश्वर,
हवा, पानी
सुंदर सुंदर
पेड़, पौधे
प्रकृति की
सुकोमलता,
तालाब,नदियां
फूल,कलियां
अदभुत
दृश्य,
मन को हरने वाले
नीचे, हम सब रहने वाले
प्यार के जोत जलाने वाले
हंसने और हंसाने वाले
किसी की उदासी
किसी की हंसी
कोई रोता है
कोई हंसता है
कोई पाता है
कोई खोता है
कोई सुखी है
कोई दुखी है
ईश्वर के भी महिमा
निराले
बस,
कलम बेचैन हो उठती है
कलम चल पड़ती है।।
-ममता तिवारी
6 महीने पहले
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